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हिंदू धर्म में 108 नंबर को शुभ क्यों माना जाता है? जानें कारण

हिंदू धर्म में 108 नंबर का क्या महत्व है? इससे जुड़े 16 मुख्य कारण हैं

why is the number 108 so important

हिंदू धर्म में तमाम कार्यों की सिद्धि के लिए माला से मंत्रों का जाप किया जाता है. ये मालाएं रुद्राक्ष, तुलसी, वैजयंती, स्फटिक, मोतियों या रत्नों से बनी होती हैं. तमाम देवी देवताओं के मंत्रों के जाप के लिए अलग अलग माला से जाप करने के नियम हैं. लेकिन इन नियमों के बीच एक बात समान है, कि सभी मालाओं में कुल 108 मनके होते हैं.

आज आचार्य मुरारी पांडेय जी आपको हिंदू धर्म में 108 नंबर की महत्ता के बारे में विस्तार से (108 Number Ka Mahatva) बताएँगे। आपने कई बार यह देखा होगा कि हिंदू धर्म के अंदर 108 नंबर की एक अलग ही पहचान है फिर चाहे वह जपमाला के मोती हो या कोई अन्य धार्मिक कार्य। हम सभी के मन में यह विचार कभी ना कभी तो आया ही होगा कि आखिर यह बस एक नंबर ही तो (Why 108 Is Important In Hinduism In Hindi) हैं तो आखिर क्यों इसे हिंदू धर्म में इतना अधिक महत्व मिला हुआ हैं।

दरअसल इसके पीछे एक नहीं बल्कि कई कारण छिपे हुए (108 In Hinduism In Hindi) हैं जो धर्म के साथ-साथ ज्योतिष, विज्ञान, गणित इत्यादि से जुड़े हुए हैं। आज हम आपको उन्हीं कारणों के बारे में बताएँगे ताकि आप 108 नंबर की हिंदू धर्म में महत्ता के बारे में अच्छे से समझ सके। आइए जानते हैं।

108 नंबर का हिंदू धर्म में महत्व (Significance Of Number 108 In Hindu Mythology In Hindi)

1. भगवान शिव का तांडव (Shiva Tandava 108 Poses Of Shiva)
भगवान शिव जब गुस्से में होते है या अत्यधिक प्रसन्न होते हैं तो वे अपना मुख्य नृत्य तांडव करते है। इसे आपने टीवी इत्यादि में देखा भी होगा किंतु क्या आप जानते हैं कि इस तांडव नृत्य में कुल 108 प्रकार की मुद्राएँ होती हैं। कहने का तात्पर्य यह हुआ कि भगवान शिव 108 विभिन्न तरह की मुद्राओं में तांडव नृत्य को करते हैं। इसी प्रकार भारतीय नृत्य शैली में भी कुल 108 प्रकार के नृत्य हैं जो अपने आप में एक अद्भुत उदाहरण है।

2. भगवान श्री कृष्ण की 108 गोपियाँ (108 Krishna Gopiyan)

जब कृष्ण भगवान अपनी यौवन अवस्था में थे तब उन्होंने वृंदावन में रासलीला रचाई थी। वह पूर्णिमा की रात थी जब श्रीकृष्ण ने 108 गोपियों संग महारास रचाया था। उस समय श्रीकृष्ण ने अपनी माया के प्रभाव से 108 रूप धर लिए थे ताकि किसी भी गोपी को उनकी कमी ना खले। इसके बाद छह माह तक यह महारास रचाया गया था जिसमे सम्मिलित होने स्वयं भगवान शिव भी एक गोपी का रूप धरकर आए थे।

3. ब्रह्मांड का स्वरुप (108 Universe Number)

हिंदू धर्म के अनुसार हमारे कुल 27 तारामंडल (नक्षत्र) है जिनकी 4 दिशाएं होती हैं। 27 को अगर 4 से गुणा किया जाये तो कुल योग 108 आता हैं। इस प्रकार यह नंबर सम्पूर्ण ब्रह्मांड के स्वरुप को भी प्रदर्शित करता है।

4. सूर्य, पृथ्वी व चंद्रमा (108 Related To Sun Earth Moon)

हमारे ऋषि-मुनियों ने आधुनिक विज्ञान के उदय से बहुत वर्षों पहले ही सौरमंडल की गहन खोज कर ली थी। उन्होंने पृथ्वी के अलावा अन्य ग्रहों और तारों के बारे में, उनके मध्य की दूरी व उनके व्यास इत्यादि के बारे में एक दम सटीक आंकलन कर लिया था। जैसे कि सूर्य या चंद्रमा का व्यास, सूर्य की चंद्रमा या पृथ्वी से दूरी इत्यादि और इसका संबंध भी 108 नंबर से हैं जिसे आज का आधुनिक विज्ञान भी मानता है।

जितनी सूर्य की पृथ्वी से दूरी है, वह सूर्य के व्यास से 108 गुणा अधिक है।
चंद्रमा की पृथ्वी से जितनी दूरी है, वह चंद्रमा के व्यास से 108 गुणा अधिक है।
इन सबके साथ सूर्य का कुल व्यास पृथ्वी के कुल व्यास से 108 गुणा अधिक है।
5. ज्योतिष शास्त्र (Significance Of 108 In Astronomy In Hindi)

हमारे सूर्य तारे के कुल 9 ग्रह है जिसमे पृथ्वी तीसरा ग्रह है। इसी के साथ ज्योतिष के अनुसार हमारी कुल 12 प्रकार की राशियाँ होती हैं। जब हमारी जन्मपत्री बनाई जाती हैं तो प्रत्येक राशि में हर ग्रह विभिन्न प्रकार से स्थापित हो सकता हैं। इस प्रकार 12 राशियों में हर ग्रह 108 तरह से स्थापित हो सकता हैं। इसी पर हमारा पूरा ज्योतिष शास्त्र निर्धारित होता है।

6. संस्कृत भाषा की वर्णमाला (108 In Sanskrit Pronunciation)

संस्कृत भाषा में कुल 54 वर्णमाला होती है जो दो भागो में विभाजित (108 Number In Sanskrit) है। इसमें 54 शब्द पुरुष अर्थात पुल्लिंग या शिव को समर्पित है व 54 शब्द स्त्री अर्थात स्त्रीलिंग या शक्ति को समर्पित है जो कि मनुष्य के पूर्ण रूप को दर्शाता है।

7. मानवीय भावनाएं (108 Chakras In Human Body)

मनुष्य मन में कुल 108 प्रकार की भावनाओं का समावेश होता हैं जिसमें 36 भावनाओं का संबंध हमारे भूतकाल से, 36 का संबंध हमारे वर्तमान से व 36 का संबंध भविष्य से होता है। इन मानवीय भावनाओं को चक्र भी कहा जाता हैं जिन्हें जागृत करके हम अपने भूत, भविष्य और वर्तमान के बारे में बहुत कुछ जान सकते हैं।

8. आयुर्वेद के अनुसार शरीर में 108 दबाव बिंदु (108 Pressure Points In Human Body)

आयुर्वेद के अनुसार हमारे शरीर में कुल 108 दबाव बिंदु (प्रेशर पॉइंट्स) होते हैं जहाँ पर दबाव डालकर शरीर के विभिन्न अंगो को सुचारू किया जाता हैं। इन दबाव बिंदुओं पर सही दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए सही समय पर दबाव डालने से शरीर की कई बिमारियों को बिना दवाई के ठीक किया जा सकता हैं।

9. धार्मिक महत्व (Why 108 Mala Beads In Hindi)

108 नंबर को हिंदू धर्म में इतना पवित्र माना जाता है कि हमारे ऋषि-मुनियों ने 9 पुराण व 108 उपनिषद लिखे हैं। इसी के साथ हिंदू धर्म में कुल 108 शक्तिपीठ है जिनका धार्मिक महत्व हैं। महाभारत का युद्ध 18 दिनों तक लड़ा गया था व महाभारत की पुस्तक में भी कुल 18 अध्याय हैं। इसी के साथ हमारी जपमाला में भी कुल 108 मोती होते हैं। इस प्रकार हिंदू धर्म में 108 नंबर की महत्ता उपरोक्त कारणों से भी अत्यधिक बढ़ जाती है।

10. श्वसन तंत्र

मानव शरीर औसतन 1 मिनट में 15 बार श्वास लेता हैं। इस प्रकार 1 घंटे में 900 बार व 12 घंटों में 10,800 बार श्वास लिया जाता हैं। एक दिन कुल 24 घंटो का होता हैं जिसे 12-12 के दो भागो में विभाजित किया गया हैं। इसमें 12 घंटे हमारे दैनिक कार्यों के लिए व बाकि के 12 घंटे भगवान को याद करने के लिए हैं। हर श्वास के साथ भगवान को 10,800 बार याद किया जा सकता हैं किन्तु ऐसा संभव नही। इसलिये हमारे धर्म ग्रंथो में कुल 108 बार जाप करने को कहा गया हैं। इसी कारण एक जपमाला में कुल 108 मोती होते हैं।

11. गंगा नदी

हिंदू धर्म में गंगा नदी को सबसे पवित्र नदी माना जाता हैं। यदि हम इसकी लंबाई व चौड़ाई का आंकलन करेंगे तो पाएंगे कि गंगा नदी देशांतर रेखा से 12 डिग्री का कोण बनाती है व रेखान्तर रेखा से 9 डिग्री का। इस प्रकार इन दोनों अंको का गुणा किया जाये तो कुल योग 108 आता है।

12. 9 नंबर का महत्व (108 Sacred Geometry)

इसी के साथ हिंदू धर्म में 9 नंबर को भी महत्पूर्ण स्थान प्राप्त हैं। 9 नंबर को ब्रह्मा का प्रतीक माना जाता है। 108 नंबर की संख्याओं का योग किया जाए तो कुल योग 9 आता हैं। इसी प्रकार आप 9 को चाहे किसी भी अंक से गुणा करे, प्राप्त उत्तर की संख्याओं को आप आपस में तब तक जोड़े जब तक वह एक नंबर की संख्या ना रह जाये, आप पाएंगे कि अंत में आपको 9 संख्या प्राप्त होगी।

उदहारण के तौर पर:

9*30= 270

अब हम 270 नंबर की संख्याओं को आपस में जोड़ेंगे तो पाएंगे कि इनका कुल योग 9 हैं।

2+7+0= 9

एक और उदहारण लेते हैं:

9*87= 783

अब आप 783 की संख्याओं को आपस में जोड़े:

7+8+3= 18

ध्यान रखे आपको तब तक जोड़ना है जब तक नंबर एक संख्या में ना रह जाये, इसलिये अब आप प्राप्त योग की संख्या को जोड़े:

1+8= 9

इस प्रकार आप 9 को किसी भी अंक से गुणा करके देख ले और प्राप्त योग की संख्याओं को तब तक जोड़े जब तक वह एक संख्या का नंबर ना रह जाये और अंत में आप हमेशा 9 नंबर ही पाएंगे।

13. मनुष्य शरीर का तापमान

108 डिग्री फारेनहाइट मनुष्य शरीर का आंतरिक तापमान होता हैं। यदि इतना ही तापमान बाहर कर दिया जाए तो शरीर के सभी अंग काम करना बंद कर देंगे और मनुष्य शरीर पिघलने लग जायेगा। कहने का तात्पर्य यह हुआ कि 108 डिग्री का तापमान मनुष्य के शरीर के सहन करने की अधिकतम सीमा हैं, इसके पश्चात मनुष्य का शरीर पिघलने की अवस्था में आ जाएगा।

अब आपको अच्छे से समझ आ गया होगा कि आखिर क्यों हिंदू धर्म में 108 अंक की संख्या को इतना महत्वपूर्ण स्थान दिया गया हैं। अब आगे से आपसे कोई भी पूछे कि आखिर 108 अंक को हिंदू धर्म में इतनी अधिक महत्ता क्यों दी जाती हैं तो आप उसे इतने कारण बताइयेगा कि वह भी आपके ज्ञान का आपका प्रशंसक बन जाए।

14. मान्यता है कि ब्रह्मांड को 12 भागों में विभाजित किया गया है

ब्रह्मांड को 12 भागों में विभाजित किया गया है. ये 12 भाग ही ज्योतिष की 12 राशियां हैं. प्रत्येक राशि का संबन्ध नौ ग्रहों में से किसी एक से है. यदि इन ग्रहों की संख्या 9 का गुणा 12 से किया जाए तो योग 108 प्राप्त होगा. इस आधार पर माला के मनकों की संख्या निर्धारित की गई है.

 15. नक्षत्रों की कुल संख्या 27 होती है

नक्षत्रों की कुल संख्या 27 होती है. हर नक्षत्र के चार चरण होते हैं. यदि 27 का गुणा चार से किया जाए तो 108 की संख्या सामने आएगी. इसी गिनती के साथ ऋषि मुनियों ने 108 मनकों की माला का विधान तैयार किया. माला का एक एक दाना नक्षत्र के एक एक चरण का प्रतिनिधित्व करता है

16. सूर्य 6 महीने में उत्तरायण और 6 महीने दक्षिणायन रहता है

सूर्य 6 महीने में उत्तरायण और 6 महीने दक्षिणायन रहता है. 6 महीने में सूर्य की कुल कलाएं 1,08,000 होती हैं. आखिरी के तीन शून्य हटाने पर ये संख्या 108 रह जाती है. इस तरह माला का हर मनका सूर्य की एक कला का प्रतीक माना जाता है.

ये है जाप करने का तरीका

जाप करते समय माला को मध्यमा उंगली पर रखकर अंगूठे की मदद से एक एक मनके को आगे बढ़ाया जाता है. सुमेरु को कभी भी लांघा नहीं जाता. माला को पकड़ते समय उसे नाभि से नीचे न रखें और नाक के ऊपर न रखें. माला को सीने से करीब 4 अंगुल दूर होना चाहिए. एक माला पूरी होने के बाद वहीं से वापस लौटकर अगली माला का जाप शुरू करें.

आचार्य मुरारी पांडेय जी

।।। जय सियाराम।।।

 

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